संघर्ष और सफलताएं एक दुसरे की सहचारिणी रही हैं। जहाँ इंसान अपने जीवन में संघर्ष को स्थान देता है, वहां सफलताएँ जरूर एक न एक दिन उसके कदम चुमते नज़र आती है। मानव को जीवन में सफलताओं की सीढ़ी चढ़ने में हमेशा से भिन्न-भिन्न प्रकार के संघर्षों का सामना करना पड़ता है। ऐसे ही संघर्ष और सफलता के रूपक के रूप में हम “बेगम अख्तर” को जानते हैं। बेगम अख्तर का संघर्ष भरा जीवन, एक औरत की कहानी को दर्शाता है जो अपने अस्तित्व की खोज में जीवन के आरम्भ से जीवन के अंत तक लगी रही। भारतीय परिवेश में स्त्री का जीवन हमेशा से कई प्रकार के बंधनों में बंधा हुआ रहा है, ऐसे में दुनिया से लड़ झगड़ कर हमारे होठों, दिल, दिमाग और मन पर छा जाने वाली इस गायिका की कल्पना मात्र से, मन में जीवन से लड़कर, अपने हिस्से की सफलता खोज कर लाने का मन करता है। ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया, जाने क्यों आज तेरे नाम पे रोना आया... वो दिन, मुझे बखूबी याद है, मेरे ऑफिस के मित्र, श्याम दीक्षित उपरोक्त पंक्तियों को बार-बार गुनगुना रहा था। मैंने उत्सुकतावश उससे इस गाने के बारे में पूछा तो उसने बताया की “बेगम अख्तर” ने यह ग़जल...
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