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कैशलेस इकॉनमी : भूत, वर्तमान एवं भविष्य

कैशलेस इकॉनमी : भूत, वर्तमान एवं भविष्य अगर गौर से देखा जाए तो डिजिटल इंडिया का आरम्भ तब हुआ जब टैक्सी सर्विस कंपनी ने भारत में अपनी टैक्सी सर्विस शुरू की। उनके पेमेंट करन...

पुस्तकें पढने के फायदे

अमूमन देखा गया है की कभी किसी समय, किसी उम्र में, किताबें पढने के शौक़ीन इंसानों का शौक, धीरे-धीरे कम होते हुए, खत्म भी हो जाता है। इंसान के जीवन में जिम्मेदारी एवं उससे उत्पन्न होने वाली व्यस्तताएँ, उसके शौक के ऊपर हावी हो जाती हैं और अगर शौक किताबें पढना हुआ तो वह ज्यादा ही हावी हो जाता है। जब आप अपने आस-पास देखते हैं, तो आपको कई ऐसे उदाहरण नज़र आते हैं। ऐसा भी हुआ है कि, अपने पढने के शौक को छोड़ देने के कई वर्षों बाद अचानक ही उनका मन बदलता है और वह फिर से किताबें पढना शुरू कर देता है। यह लेख उन सभी अनगिनत इंसानों के लिए है जिन्होंने अपने पढने के शौक से यह कहकर किनारा कर लिया है कि – उनके पास अब इस शौक के लिए वक़्त नहीं है, अब इस शौक से ज्यादा भी अहम् चीजें हैं जिन्हें प्राथमिकता देना पड़ता है, आदि। किताबें पढने वालों एवं किताबी कीड़ों से, सामान्य इंसान का सबसे पहला सवाल यह होता है की किताबें पढने से फायदा क्या है? कमाल है, यह सवाल ऐसे इंसान आपसे पूछेंगे जिन्होंने अकेडमिक किताबों को पढ़ कर ही आपसे यह सवाल पूछने का हिम्मत किया होगा क्यूंकि अगर कोई व्यक्ति अधिक पढ़ा-लिखा नहीं ह...

प्रिंट ऑन डिमांड – बुकस्टोर

प्रिंट ऑन डिमांड – बुकस्टोर ये दुनिया भी न अजीबोगरीब चीज़ों से भरी पड़ी है। अभी हाल ही में यह जानकार आश्चर्य हुआ की पेरिस में एक बुकस्टोर है, वहां से अगर आप कोई पुस्तक खरीदते हैं तो वे आपको हाथों-हाथ तो नहीं लेकिन जितना वक़्त आपको एक कॉफ़ी पीने दौरान लग सकता है, उतने वक़्त में आपको किताब प्रिंट करके दे देते हैं। बड़ा सुखद एहसास होता होगा, उन पुस्तकप्रेमियों को, जिन्हें हार्डकॉपी में पुस्तक पढना पसंद है। वो मशीन से, निकली हुई किताब की गर्मी का आनंद गर्म कॉफ़ी से ज्यादा लेते होंगे। पेरिस के बीचों-बीच स्थित, इस बुकस्टोर का नाम Librairie des Puf या Les Puf है। इस बुकस्टोर में किताबों की हार्ड कापियां नहीं रखी जाती। इस बुकस्टोर के डेटाबेस में मौजूद किताबें जो पीडीऍफ़ फॉर्मेट होती हैं, उनमे से कोई आप खरीदिये और एक कॉफ़ी लेकर बैठ जाइए। जितने देर में आपकी कॉफ़ी खत्म होगी, उतने देर में आपकी किताब वहां मौजूद Espresso Book Machine से पांच मिनट के अन्दर प्रिंट होकर आपके टेबल पर पहुँच जायेगी। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बुक स्टोर, अपने यहाँ से प्रकाशित ५००० किताबों के अलावा डिमा...

बुक वेंडिंग या डिस्पेंसिंग मशीन

बुक वेंडिंग या डिस्पेंसिंग मशीन इन्टरनेट पर कुछ लेखों को पढ़ते रहने की लगातार आदत के कारण एक ऐसे लेख को पढने का मौका मिला जिसने मुझे आश्चर्यचकित कर दिया। मुझे उस लेख से पता चला की सिंगापूर में “बुक एक्चुअली” संस्था द्वारा तीन बुक वेंडिंग मशीन लगाया गया है। मैंने कॉफ़ी वेंडिंग मशीन तो देखा है, मेट्रो स्टेशन पर चिप्स और चॉकलेट डिस्पेंसिंग मशीन भी देखा है, कोल्ड ड्रिंक डिस्पेंसिंग भी देखा है, लेकिन बुक वेंडिंग या डिस्पेंसिंग मशीन कभी देखा नहीं था, इसलिए यह जानकारी मेरे लिए अनोखा ह ी था। सिंगापुर के राष्ट्रीय संग्रहालय और विजिटर सेंटर पर दो बुक वेंडिंग मशीन पहले से मौजूद हैं, जिसमे से प्रत्येक में १२० से १५० पुस्तकें रखी जाती हैं, जिसे पाठक उसी तरह से खरीद सकता है जैसे वह ऐसे डिस्पेंसिंग मशीन से चॉकलेट और चिप्स खरीदा करता था। बुक डिस्पेंसिंग मशीन का इतिहास भी बहुत पुराना है। सन १८२२ में, इंग्लैंड के रिचर्ड कारलिले नामक व्यक्ति ने सरकार द्वारा प्रतिबंधित किताबों को बेचने के लिए और गिरफ्तारी से बचे रहने के लिए पहली बार एक बुक डिस्पेंसिंग मशीन बनाया, जिसके द्वारा पाठक उन कि...

Perfumes for Book Lover

Perfumes for Book Lover लेखकों, पाठकों एवं किताबों की दुनिया अजीबोगरीब अचंभों से भरी हुई है। कई अनोखी बातों से आप रोजाना रूबरू हो सकते हैं। ऐसी ही एक अनोखी जानकारी के बारे में मुझे तब पता चला जब मैं इन्टरनेट की दुनिया में किताबी कीड़ों की दुनिया को खंगाल रहा था। मुझे पता चला की संसार में कुछ ऐसी परफ्यूम बनाने वाली कंपनियां हैं, जो ऐसे इत्र (परफ्यूम) का निर्माण कर चुकी हैं, जिनका इस्तेमाल संसार के किताबी कीड़े या पुस्तक प्रेमी, अपनी उस क्षुधा को मिटाने के लिए कर सकते हैं, जिनसे वे कभी पार नहीं पा सके। Sweet Tea Apothecary नामक परफ्यूम बनाने वाली कंपनी ने Dead Writers सीरीज के अंतर्गत ऐसे परफ्यूम को लेकर आई है, जिसके इस्तेमाल भर से आपको यह अहसास होने लगेगा की आप एक पुरानी लाइब्रेरी में खड़े हैं और आपके चारों ओर किताबें ही किताबें हैं। काली चायपत्ती , लौंग , कस्तूरी , वेनिला , हेलीओट्रोप और तंबाकू के मिश्रण से तैयार यह परफ्यूम आपको वही एहसास दिलाएगी जिसे आप तब महसूस करते हैं जब पुस्तकों के बीच ही आपका उठाना बैठना रहता हो। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें :-  डेड राइ...

हाँ! मैं बूकहोलिक हूँ!

हाँ! मैं बूकहोलिक हूँ! पुस्तकें पढ़ना मेरा हमेशा से शौक रहा है और लगता भी नहीं की इस शौक़ को कभी विराम लगेगा। मेरा मानना है कि मेरे इस क्रिया पर विराम लगना भी नहीं चाहिए। इस शौक़ का परिणाम यह हुआ की मेरे मित्रता सूचि में और मेरे आस-पास के लोगों में, पढ़ाकू लोगों की भरमार हो गयी है। वे मेरे द्वारा किताब पढ़े जाने एवं उसकी समीक्षा किये जाने पर, तारीफ भी करते हैं लेकिन तारीफ़, प्रशंसा आदि वो मायावी चीजें हैं जिनकी मुझे कभी इच्छा नहीं रही। जब भी मैं बताता हूँ की मैं फलां पुस्तक पढ़ रहा हूँ तो कई मित्रों का जवाब आता है की अच्छी किताब है पढ़ डालो। कुछ नए पाठक और पुराने पाठक, कभी-कभी मुझसे पूछते भी हैं कि उनको कैसी और कौन सी किताब पढनी चाहिए। यह गतिविधि मुझे बहुत पसंद है, क्यूंकि मैं स्वयं अधिक से अधिक किताबें पढने का शौक़ीन हूँ। इसलिए जितना ज्यादा मेरे पास रिकमेन्डेशन आता है, उतना ही, मेरे लाइब्रेरी में या TBR (टू बी रीड) केटेगरी में किताबों की संख्या बढती जाती है। कई बार तो मुझे अपने मित्र को कहना पड़ता है – “यार, मेरे पास तो वैसे ही कई किताबें हैं, जिनको अभी मैंने पढना है और त...

सेल्फ-पब्लिशिंग (सितारों से आगे जहाँ और भी हैं)

सेल्फ-पब्लिशिंग कुछ मित्रों के लिए नाम कुछ अनोखा लग सकता है लेकिन आज के समय में यह नाम चिर-प्रचिलित है। आपको याद है, शायद आपने सुना और पढ़ा भी होगा, “ Immortals of Meluha ( मेलुहा की मृत्युंजय) ” , अमीश त्रिपाठी द्वारा लिखित यह पहली पुस्तक है। बताया जाता है की लगभग २० के करीब नियमित प्रकाशन संस्थाओं ने उनकी पुस्तक को प्रकाशित करने से मना कर दिया। उसके बाद अमीश त्रिपाठी ने पुस्तक को सेल्फ-पब्लिश कराया और जिसका नतीजा आप जानते हैं की वह किताब पाठकों द्वारा हाथों-हाथ ली गयी जिसके कारण इस सीरीज की अगली दो पुस्तक के लिए वेस्टलैंड पब्लिशर ने उनसे १० लाख रूपये का अनुबंध किया। इस बिंदु पर मुझे इकबाल साहब द्वारा लिखित एक ग़ज़ल याद आ गया:- सितारों से आगे जहाँ और भी हैं अभी इश्क़ के इंतेहाँ और भी हैं तही ज़िंदगी से नहीं ये फ़िज़ाएं यहाँ सैकड़ों कारवाँ और भी हैं कनात ना कर आलम-ए-रंग-ओ-बू पर चमन और भी आशियाँ और भी हैं अगर खो गया एक नशेमान तो क्या गम मक़मत-ए-आ-ओ-फुघान और भी हैं तू शाहीन है परवाज़ है काम तेरा तेरे सामने आसमाँ और भी है इसी रोज़-ओ-शब मे उलझ कर ना रह ...