Skip to main content

Posts

Showing posts with the label क्राइम इन्वेस्टीगेशन (नॉलेज)

द कलर्स ऑफ़ मर्डर (The Colors of Murder) - Part 3

द कलर्स ऑफ़ मर्डर भाग-3 सर सुरेन्द्र मोहन पाठक जी के कई उपन्यासों पर ध्यान दिया जाए तो उससे हमें यह पता चलता है की किसी अमुक और अजनबी लाल रंग के धब्बे का जब परिक्षण किया जाता है तो उससे सिर्फ ब्लड ग्रुप के बारे में जानकारी मिलती है जिसके आधार पर सस्पेक्टस को धीरे-धीरे एलिमिनेट किया जाता है। लेकिन हम कभी यह नहीं जान पाते की किसी अमुक लाल रंग के धब्बे से या खून के धब्बे से कैसे ब्लड ग्रुप की जानकारी निकाली जा सकती है। ‘द कलर्स ऑफ़ मर्डर’ के पिछले दो भाग हमें फॉरेंसिक विज्ञानं में खून के एनालिसिस द्वारा कई महत्वपूर्ण जानकारी निकालने का तरीका बताते हैं। पहले किसी भी इन्वेस्टिगेटर का यह लक्ष्य होता है की जो अमुक धब्बा है वह खून है की नहीं। इसके दो टेस्ट के बारे में हमने बात किया था। एक टेस्ट तो मौकाए-वारदात पर ही संपन्न किया जाता है लेकिन लैब में भी दुसरे टेस्ट द्वारा यह गारंटी ली जाती है की जो परिणाम मौकाए-वारदात पर किये गए टेस्ट के दौरान आया वह सही है की नहीं। अगर परिणाम सही आता है तो अगले कदम के तौर पर यह निर्धारित किया जाता है की अमुक खून मनुष्य का है या जानवर का। इस...

द कलर्स ऑफ़ मर्डर (The Colors of Murder) - Part 2

द कलर्स ऑफ़ मर्डर भाग- 2 फॉरेंसिक साइंस ने आज जो तरक्की की है, आज जिस मुकाम पर फॉरेंसिक साइंस पहुँच चूका है उस तक पहुँचने के लिए 3-४ शताब्दियों का सहारा लिया है। आधुनिक युग के फॉरेंसिक साइंस हमारे लिए बहुत उपयोगी तो है लेकिन इसके पीछे लगी कितने ही वैज्ञानिक, डॉक्टर्स, पेथालोजिस्ट और केमिस्ट की मेहनत को हम लगभग भुला ही चुके हैं। इस ४०० वर्षों के वृहद् इतिहास में कई ऐसे तकनीक थे जिन्होंने फॉरेंसिक साइंस को उसके मौजूदा आधुनिक जामा पहनाया है। विकिपीडिया से हासिल एक कमाल की जानकारी के अनुसार सन १२४८ में पहली बार एक कहानी संग्रह में मेडिसिन और कीटविज्ञान का प्रयोग किसी केस को हल करने में किये जाने का जिक्र है। यह कहानी संग्रह चाइना के लेखक Song Ci   द्वारा लिखा गया था जिसका नाम Xi Yuan Lu   (अनुवादित नाम - Collected Cases of Injustice Rectified   या   Washing Away of Wrongs ) था। इस संग्रह की एक कहानी में एक व्यक्ति की ह्त्या दरांती से होती है जिसके बाद केस का इन्वेस्टिगेटर सभी को अपनी अपनी दरांती लाने को कहता है। इन्वेस्टिगेटर सभी दरांती से एक पशु के शव पर घ...

Plotter Vs Pantser - Which are you?

Plotter Vs Pantser दोस्तों, कुछ दिनों पहले इन्टरनेट की दुनिया को जब मैं छान रहा था (पुरानी आदत है) तो एक ऐसी जानकारी मेरे हाथ लगी जिसके लिए मुझे लगा की आप सभी से शेयर करूँ। आपने कई बार ऐसी पुस्तकें देखी होंगी जिनके अंत में लेखक ने अपने उस पुस्तक के लिए किये गए रिसर्च वर्क के लिए दूसरी पुस्तकों और संस्थाओं को क्रेडिट दिया होता है। वहीँ कुछ लेखक ऐसे भी होते हैं कि दिमाग में आईडिया आया और लिखने बैठ गए। लेखकों को उनके लिखने के तरीके से दो भागों में बांटा जाता है – Plotters और Pantsers। आइये इन दोनों बिन्दुओं पर बारी-बारी से बात करते हैं। Plotters – इस श्रेणी के लेखक वो होते हैं जो पहले नावेल को प्लान करते हैं फिर लिखते हैं। ऐसे लेखक समय से आगे जाकर उपन्यास को लिखने की योजनायें बनाते हैं, वो परत-दर-परत घटनाओं की योजना बनाते हैं कि आगे क्या होगा। ऐसे लेखक पहले ही अपने दिमाग में या पेपर पर घटनाओं को श्रेणीबद्ध कर लेते हैं फिर उसके बाद कहानी को लिखना शुरू करते हैं। जिस प्रकार से पुतली का खेल दिखाने वाला कहानी को कदम-दर-कदम प्रस्तुत करता है उसी तरह से ये लेखक भी करते हैं और यह त...

द कलर्स ऑफ़ मर्डर (The Colors of Murder)

द कलर्स ऑफ़ मर्डर भाग-1 पाठक साहब के द्वारा लिखे गए लगभग सभी उपन्यास क्राइम-फिक्शन श्रेणी के अन्दर आते हैं। चूंकि वो क्राइम-फिक्शन लिखते हैं तो उसमे क्राइम होना तो आम बात है। जब क्राइम हो कहानी में तो खून के धब्बे और उसकी धार दिखना भी साधारण सी बात है। कई बार ऐसा होता है कि मौकायेवारदात पर कुछ खून के धब्बे नज़र आते हैं जो लाश से अलग होते हैं। ऐसे में उस खून के धब्बे की जांच पुलिस जैसी इन्वेस्टीगेशन एजेंसी के लिए बहुत मुश्किल काम बन जाती है। मौकायेवारदात से उठाये गए सभी प्रकार के सूत्रों को फॉरेंसिक टीम अपने लैब में लेकर जाती है जहाँ उस पर से फिंगर-प्रिंट और दुसरे सूत्रों की तालाश की जाती है। अगर ऐसे किसी मौकायेवारदात पर कोई लाल धब्बा नज़र आये तो क्या उसे खून ही मान लेना चाहिए। गौर करने वाली बात यह है “धोखा” उपन्यास में जब रोहित पहली बार लाश देखता है तो उसे खून की धार साफ़ नज़र आती है लेकिन बाद में लाश और उसके इर्द-गिर्द फैला खून भी गायब हो जाता है। जब विवेक अगाशे इन्वेस्टीगेशन करने के लिए आता है तो उसे भी वहां कुछ नहीं मिलता। लेकिन सोचिये अगर विवेक अगाशे को वहाँ कोई ला...

क्राइम फिक्शन और उसकी शाखाएं

क्राइम फिक्शन और उसकी शाखाएं सर सुरेन्द्र मोहन पाठक जी ने ३०० के करीब पुस्तकों के रचना की है जिनमे से अधिकतर क्राइम फिक्शन जेनर से सम्बंधित हैं। क्राइम फिक्शन जेनर एक बहुत ही वृहद् शब्द है जिसकी कई शाखाएं हैं। आपने कभी सोचा है कि फलां नावेल कौन सी शाखा का है। शायद नहीं सोचा होगा क्यूँकि हम सिर्फ दो ही केटेगरी को जानते हैं और वो है थ्रिलर और मर्डर मिस्ट्री। लेकिन अमूमन हम इन दो केटेगरी को भुला कर सिर्फ सीरीज बेस्ड केटेगरी को ही मानते हैं। आज आपको मैं क्राइम फिक्शन की अलग-अलग शाखाओं से परिचय कराता हूँ। ये शाखाएं कहानी पढने के साथ –साथ कहानी लिखने में भी आपकी सहायता करेंगे। पाठक सर के कई उपन्यासों इन्ही शाखाओं को मिला-जुला कर तैयार किया गया जाम होती हैं जिसको हम पन्ने-दर-पन्ने पलट-पलट कर पढ़ते हुए चटखारे लेकर ही मजा लेते हैं। कोज़ी क्राइम ( Cosy Crime) – क्राइम फिक्शन जेनर की यह शाखा बहुत ही प्रसिद्द है। अमूमन एक छोटे से शहर में इसकी कहानी को प्लाट किया जाता है जहाँ एक हत्या के केस को हल करने के लिए पुलिस या प्राइवेट डिटेक्टिव काम करते हुए नज़र आते हैं। इसमें जुर्म का कोई ...

कार्पस ड़ेलेक्टी – ए क्राइम इन्वेस्टीगेशन टर्म

कार्पस ड़ेलेक्टी – ए क्राइम इन्वेस्टीगेशन टर्म सभी सुमोपाई बंधुओं को सलाम। फिर से एक बार आप लोगों के लिए साधारण सी जानकारी लेकर आया हूँ। पाठक साहब ने एक लघु कथा “किताबी क़त्ल” लिखा था जिसे एक बार उपन्यास के रूप में भी छापा गया था। अगर आप इस कहानी को पढेंगे तो आप क्रिमिनल इन्वेस्टीगेशन के एक नुक्ते से आसानी से परिचित हो जायेंगे। खैर आप सभी को अगर ध्यान न हो तो मैं आप सभी की कृपा दृष्टि उस नुक्ते की ओर ले जाना चाहूँगा। “किताबी क़त्ल” की कहानी में जब इन्वेस्टीगेशन ऑफिसर मौकायेवारदात पर पहुँचता है तो उसे ऐसा लगता है की वहां क़त्ल हुआ है लेकिन उसे वहां लाश नज़र नहीं आती है। मौकायेवारदात से मिले कई सूत्रों से पता चलता है की वहां घर के मालिक का क़त्ल हुआ है लेकिन लाश न मिलने की सूरत में इन्वेस्टीगेशन ऑफिसर उसे एक नुक्ते के रूप में लेता है। इन्वेस्टीगेशन ऑफिसर ने इस नुक्ते को “कार्पस डेलिक्टी” का नाम दिया। इस बिंदु पर जब थोड़ी बहुत इन्टरनेट द्वारा खोज बीन किया तो पता चला की इन्वेस्टीगेशन ऑफिसर द्वारा बोला गया यह टर्म क्राइम इन्वेस्टीगेशन में बहुत मायने रखती है। “कार्पस डिलेक...