A Diary of SMPian - 2 अप्रैल-जून, सन २००३ – मेरी डायरी के पिछले पन्ने में आपने पढ़ा कि कैसे मैंने सर सुरेन्द्र मोहन पाठक जी का पहला उपन्यास पढ़ा। “करमजले” उपन्यास – जो कि विमल सीरीज के उपन्यास “असफल अभियान” और ‘खाली वार’ का सामूहिक संस्करण था और इस बात की जानकारी उस वक़्त मुझे बिलकुल नहीं थी। सच बात यह थी की मुझे सर सुरेन्द्र मोहन पाठक जी की बारे में ही कोई जानकारी ही नहीं थी। खैर कैसे मुझे इस बारे में जानकारी मिली इसके बारे में आगे के पन्नों में बात करूँगा। “करमजले” उपन्यास के थ्रिल और एडवेंचर ने मुझे इतना मुतमुइन किया कि मैंने उसे दुबारा पढना शुरू कर दिया था। इस उपन्यास का क्लाइमेक्स इतना शानदार था की पहली बार पढने के दौरान ही मेरे आँखों में आंसू आ गए थे। मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं थी की विमल कौन था और सुनील कौन था और दोनों कि क्या खासियत थी। लेकिन उस उपन्यास से मुझे यह जरूर पता चल गया था की विमल एक ऐसा अपराधी है जिसने मजबूरन ही अपराधियों का जामा पहन लिया था। वहीँ सुनील की ईमानदारी के बारे में मुझे सुनील-रमाकांत के पहले संवाद से पता चल गया था। लेकिन इस उपन्य...
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